सोमवार, 10 अगस्त 2009

ब्रत के लिए बरफी !

बादाम की बरफी
तैयारी का समय :१५ मिनट
पकाने का समय :२० मिनट
सामग्री :
खोया ...५०० ग्राम
चीनी ...५०० ग्राम
बादाम ...२५० ग्राम ( पिसा हुआ )
इलायची ...१ चम्मच ( पिसी हुई )

बनाने की विधि :
खोये को धीमी आंच पर १० मिनिट तक भून लें !...भूने खोये को ठंडा होनें दें !
...अब चीनी को १/२ कप पानी डाल कर चाशनी बनाने के लिए आच में रखें ...१० मिनिट में गोली की चाशनी बन जाए तो उसमें भुना हुआ खोया मिला कर बराबर चलाते रहें । जब खोया मिल जाए तो बादाम पाउडर मिलाएँ ।
...अब थाली पर घी की चिकनाई लगा कर बनाई गई सारी सामग्री उस पर बराबर बिछा दें ...उस पर इलायची पाउडर बुरक दें । ठंडा होने पर इसे मनचाहे आकार में काट लें ...तैयार हो गयी ' बादाम की बरफी ' ...मेहमानों को परोसें !

पोस्ता ( ख़स-ख़स ) की बरफी
तैयारी का समय :१५ मिनट
पकाने का समय :२० मिनट
सामग्री :
खोया ...५०० ग्राम
चीनी...५०० ग्राम
ख़स-ख़स ...२५० ग्राम
काजू ...१०० ग्राम
इलायची ...१ चम्मच (पिसी हुई )

बनाने की विधि :
--खोये को १० मिनट तक भूनें । भूने खोये ठंडा होनें दें ।
--ख़स-ख़स को ५ मिनट तक भूने । भुने ख़स-ख़स को मिक्सी में पीस लें ।
--अब चाशनी बनाएं। ...चीनी में १/२ कप पानी मिला कर चलाते रहें ...१० मिनट में की चाशनी बन जायेगी । ...अब धीमी आंच में भुना हुआ खोया मिलाएँ । ...बाद में इसमें पिसा हुआ ख़स-ख़स मिलाएँ ...साथ ही इलायची पाउडर भी मिला दें ।
--अब थाली में घी की चिकनाई लगा कर सारी सामग्री फैला दें ...इस पर कटे हुए काजू सजाएं ...और ठंडा होने पर मनचाहे आकर में काट कर ' ख़स-ख़स की बर्फी ' परोसें ।

नारियल की बरफी
तैयारी का समय :१५ मिनट
पकाने का समय :२० मिनट
सामग्री :
नारियल ...१०० ग्राम ( बुरादा )
चीनी ...२५० ग्राम
दूध...१ लीटर
इलायची ...१ चम्मच (पिसी हुई )
चांदी का वर्क...१ पैकेट

बनाने की विधि:
--दूध को गरम करें । ...गरम करते-करते जब दूध आधा हो जाए उसमे चीनी मिला दें । ...१० मिनट बाद नारियल पाउडर मिला दें । गाढ़ा होने तक चलाते रहें ...इसमे इलायची पाउडर भी मिला दें ।
--थाली में घी की चिकनाई लगा कर सारा सामग्री उस पर फैला दें । चांदी का वर्क लगाएं और मनचाहे आकर में काट कर परोसें !

__पुष्पा रिछारिया
आम्रपाली ग्रीन -बी-१२०२ए ,१३ फ्लोर
१/३ वैभव खंड , इंदिरापुरम
गाजियाबाद ( उत्तर प्रदेश )
फ़ोन - ०१२० ४१३ ४६ ७१

सोमवार, 20 अप्रैल 2009

सम्पादकीय टीम

सम्पादकीय कोआर्डिनेटर : ३ - २० से २५ हजार = ७५,000 हजार प्रति माह

सम्पादकीय सहयोगी : ८ - १० से १२ हजार = ९६,000 हजार

लेखक , रिपोर्टर , फोटो ग्राफर ( फ्रीलांस ) = ,००,००० लाख

यात्रा भत्ता और टेलीफोन = ५०,००० हजार कुल मासिक = ३,२१,००० प्रति माह

प्रति सप्ताह = ८०,२५० रु ।

कम्प्युटर और ग्राफिक्स : टीम लीडर =१५,०००

सहयोगी ४ ( ८-१०-१२ हजार ) = ४८,०००

विज्ञापन : लीडर =२०,०००

सहयोगी - २ ( १२ से १५ हजार ) =३०,०००


प्रसार :लीडर =१५,०००

सहयोगी २ (८ से १० हजार ) = २०,००० कुल मासिक =१,४८,०००

प्रति सप्ताह = ३७,०००

...समाचार - विचार साप्ताहिक

प्रति रविवार प्रकाशित होने वाले __सम्पूर्ण समाचार-विचार साप्ताहिक के प्रकाशन की प्रस्तावित रूपरेखा __

पेज : १६ + ८ = २४

पेज : मैगजीन ३६ ....कुल पेज : ६०

प्रकाशन : प्रति रविवार मूल्य : १० रु । * किसी भी तरह का आई कार्ड दर्ज कराने पर सिर्फ़ _७रु ।

प्रथम - खंड

१-फ्रंट पेज _ ५ से ७ विश्लेषात्मक समाचार + एंकर + एक इंटरव्यू

२-इस सप्ताह / अगले सप्ताह + राशिफल + प्रतिक्रया + कार्टून +.....+.....

३ - ४ -नेशनल न्यूज ट्रेक

५ - ६ -रीजनल न्यूज ट्रेक


द्वितीय खंड : - ८ - ९ - १० विशेष : मंथन _ पेज -७ _ सम्पादकीय

_ अग्रलेख

_ उपलेख

_ टिप्पणी २

_ विशेष टिप्पणी १

_ कार्टून

पेज -८ - ९ :एक ही मुद्दे पर क्रेंदित दो पेज

पेज - १० : छोटे - बड़े तीन इन्टरव्यू + २ - ३ समीक्षा

११ -१२ :कौर्पोरेट + बाजार + टेक्नोलोजी

१३ -१४ : खेल

१५ -सिनेमा - मनोरंजन

१६- इन्द्रधनुष : देश - विदेश की विविध रोचक खबरें + फोटो + ग्राफिक्स


तृतीय खंड : मेट्रो प्लस __दिल्ली व एनसीआर

विकास, स्थानीय राजनीत, शिक्षा , चिकित्सा , रियल स्टेट , सिनेमा रिलीज ,प्रमोशन ,टीवी ,संगीत ,नृत्य ,कला,सभा -सेमीनार ,धार्मिक आयोजन,खेल गतिविधि,बाजार ..., ....,

१- दिल्ली व एनसीआर की खबरें

२-३ :सिनेमा,टीवी , स्थानीय गतिविधियाँ, सितारों के कार्यक्रम ,फ़िल्म प्रोमोशन ,रैली ,ट्रेडफेयर,जंतर-मंतर

४-नोयडा, ग्रेटर नोयडा ,गाजियाबाद ,बसुन्धरा वैशाली

५- गुडगाँव ,फरीदाबाद

६-७ : रीयल स्टेट , शिक्षण संस्थान , मेडीकल, शापिंग माल ,बाजार

८- ग्लैमरस फोटो व खबरें


चतुर्थ खंड : वाह जिंदगी ! ३६ पेज की रंगीन पत्रिका __यह अखबार निकालने के तीन माह बाद यानी __जनवरी २०१० में प्रकाशित होगी ! इसका विवरण और योजना बाद में __यह पत्रिका महिलाओं और युवा वर्ग को ध्यान में रख कर बनेगी !!!

शनिवार, 11 अप्रैल 2009

बुनियादी तौर पर मैं !

बुनियादी तौर पर मैं __रस , रंग , कविता और अभिनय के फोर्स व फ्लेवर से संचालित रहा हूँ । मेरी किसी भी किसिम की रचनात्मकता में __समय , समाज और सभ्यता का स्पष्ट वेग रहा है । __अपने पहले कृतित्व __स्व संपादित ' इन्द्रधनुष ' ( सन १९७५ में संपादित-प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ) और बाद में मुम्बई के दौर में __हिन्दी एक्सप्रेस, श्री वर्षा, करंट और धर्मयुग के सम्पादकीय-कर्म में ये गुण-तत्व बराबर निखार पाते रहे । चक्रम और मेट्रो टाइम (ये दोनों अखबार क्रमश जून १९८७ , इलाहबाद और मई १९९१, दिल्ली ) के दौरान ये और निखार पर आए ।

लेखन-सम्पादन से ज्यादा मेरी रुचि __कांसेप्ट, प्लानिंग, लेआउट और प्रेजेंटेशन में रही __जिसका भरपूर प्रवाह राष्ट्रीय सहारा के ' उमंग ' और ' खुला पन्ना ' में १९९१ से १९९५ तक प्रर्दशित है ।

भाषा की रवानी , कथ्य की कहानी , आकषर्क फोटो और ग्राफिक्स से सजे ...धर्मयुग , करंट , राष्ट्रीय सहारा के उमंग और खुला पन्ना के वे पन्ने हालाँकि इतिहास के झरोखे से उन लोगों के जेहन में अभी भी झांकते हैं जो उस दौर के हिन्दी-प्रवाह के साथ आँख खोल कर चले और आज भी अतीत की उस श्रेष्ठता को सराहने में झेंपते नहीं ।...और मैं ...मैं तो बेचैन हूँ ...नए कैनवास की तलाश में ...जहाँ फ़िर पत्रकारिता का नया बसंत रचा जा सके ।

कागज़ हो , कैनवास हो , पिक्चर ट्यूब हो या वेब जनित नया मोर्चा __प्रक्षेपण का आगाज हो तो __नए और समयाकूल तीर अभी भी तैयार हैं __नई इबारत लिखने के लिए !

डॉ . धर्मवीर भारती , डॉ महावीर अधिकारी , शरद जोशी का सानिध्य और रचना-संजाल अभी भी जीवंत है !...धारदार है ! !

...अपनी सोच , समझ और अभिव्यकि्त की क्षमता __रस, रंग, कविता और अभिनय के फोर्स और फ्लेवर से अभी भी लबरेज और तरोताजा है ।

मंगलवार, 24 मार्च 2009

सन्दर्भ : नवरात्र __संतोष जी के लिए

नवरात्र के कायर्क्रम के सन्दर्भ में रुपरेखा प्रस्तुत है _

२० मिनट के कार्यक्रम में ५-५ मिनट के ४ खंड होंगे __

१- दिन विशेष के अनुसार देवी का वर्णन
२-पूजा और व्रत का विधान
३-व्रत के दिन के फलाहार की रेसिपी
४-शहर के देवी मंदिरों के दर्शन और विद्वान पुजारियों ,जानकारों ओ भक्तों से बातचीत

दिनों की ९ देवियाँ _


bhoomikaa : (ainkar )भगवती की आराधना मनुष्य प्रतिदिन कर सकता है। परंतु वर्ष में अश्विन शुक्ल पक्ष प्रथमा से अश्विन कृष्ण पक्ष नवमी तक और चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा से चैत्र नवमी (रामनवमी) तक विशेष नौरात्रि पर्व में आराधना करने से राज्य, ऐश्वर्य, मोक्ष की प्राप्ति होती है।भगवती की भक्ति कर जिज्ञासु प्रेमी अर्थार्थी अपने मनोरथ पूर्ण कर चुके हैं। भगवती इन 9 दिवसों में नौ (मूर्तियों) रूपों में विराजमान होती हैं।

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।तृतीयं चन्द्रघंटेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्।।
पञ्चमं स्कंदमातेति षष्ठं कात्यायिनी च।सप्तमं कालरा‍त्रीति महागौरीति चाष्टमम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नव दुर्गा: प्रकीर्तिता:।उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना।।1।

शैलपुत्री : गिरिराज हिमालय की पुत्री पार्वतीदेवी। यद्यपि ये सबकी अधीश्वरी हैं तथापि हिमालय की तपस्या और प्रार्थना से प्रसन्न हो कृपापूर्वक उनकी पुत्री के रूप में प्रकट हुईं।

2। ब्रह्मचारिणी : ‍ब्रह्म चा‍रयितुं शीलं यस्या: सा ब्रह्मचारिणी। अर्थात सच्चिदानंदमय ब्रह्मस्वरूप की प्राप्ति कराना जिनका स्वभाव हो वे ब्रह्मचारिणी हैं।

3। चंद्रघंटा : चंद्र: घंटायां यस्या: सा-- आह्लादकारी चंद्रमा जिनकी घंटा में स्थि‍त हो, उन देवी का नाम चंद्रघंटा है।

4। कूष्मांडा : कुत्सित: ऊष्मा कूष्मा त्रिविधतापयुत: संसार: स अण्डेमांसपेश्यामुदररुपायां यस्या: सा कूष्मांडा। अर्थात त्रिविध तापयुक्त संसार जिनके उदर में स्थित है, वे भगवती कूष्मांडा हैं।

5। स्कंदमाता : भगवती की शक्ति से उत्पन्न हुए सनत् कुमार का नाम स्कंद था और उनकी माता होने से वे स्कंदमाता कहलाती हैं।

6। कात्यायिनी : देवताओं का कार्य सिद्ध करने के लिए देवी महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट हुईं अत: कात्यायिनी कहलाईं।

7!कालरात्रि : सब दुष्टों को मारने वाली काल की भी रात्रि होने से उनका नाम कालरात्रि है।

8। महागौरी : इस भगवती ने तपस्या द्वारा महान गौरवर्ण प्राप्त किया था। अत: महागौरी कहलाईं।

9। सिद्धिदा‍त्री : सिद्धि देने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली भगवती का नाम सिद्धिदात्री हुआ।

इन सभी देवियों , उनके भोग , श्रंगार और उनकी विशेषताओं के बारे में
सुयोग्य व अधिकृत विद्वान के साथ बातचीत होगी ।

पूजा और व्रत का विधान : घर में बने पूजा-स्थल के द्रश्यों के साथ पूरे विधान की चर्चा ।

एंकर :
इस प्रकार इन नौ रूपों को श्रद्धा, शांति और पूर्ण विश्वास के साथ मनाने से और इनकी आराधना करने से भगवती अवश्य प्रसन्न होती है। भगवती से माँ के रूप में अपनी रक्षा की प्रार्थना करो। देखो, आपकी रक्षा करके आपको संपन्न बना देगी।

नमस्तेऽस्तु महारौद्रे महाघोरपराक्रमे। महाबले महोत्साहे महाभयविनाशिनी।।

महान, रौद्ररूप, अत्यंत घोर पराक्रम, महान बल और महान उत्साह वाली देवी! तुम महान भय का नाश करने वाली हो, तुम्हें नमस्कार है। तुम्हारी ओर देखना भी कठिन है। शत्रुओं का भय बढ़ाने वाली जगदम्बिके! मेरी रक्षा करो।

त्राहि मां देवि दुष्प्रेक्ष्यें शत्रूणां भयवर्धिनि।प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्री आग्नेय्यामग्निदेवता।।

दवाराही नैऋत्यां खड्‍ग धारिणी।प्रतीच्यां वारूणी रक्षेद्‍ वायव्यां मृगवाहिनी।।क्षिणेऽतु

उदीच्यां पातु कौमारी ऐशान्यां शूलधारिणी।उर्ध्व ब्रह्माणि मे रक्षेदधस्ताद वैष्णवी तथा।।

एवं दश दिशो रक्षेच्चामुण्डा शववाहना।जया मे चागृत: पातु विजया पातु पृष्ठत:।।

ऐक्नकर या वाइस ओवर :

पूर्व दिशा में ऐन्द्री मेरी रक्षा करे। अग्निकोण में अग्निशक्ति, दक्षिण दिशा में वाराही तथा नैऋत्य कोण में खड्‍गधारिणी मेरी रक्षा करें।पश्चिम दिशा में वारूणी और वायव्य कोण में मृग पर सवारी करने वाली देवी मेरी रक्षा करें। उत्तर दिशा में कौमारी और ईशान कोण में शूलधारिणी देवी रक्षा करें। ब्रह्माणि! तुम ऊपर की ओर से मेरी रक्षा कीजिए और वैष्णवी देवी नीचे की ओर से मेरी रक्षा करें। इसी प्रकार शव को अपना वाहन बनाने वाली चामुण्डा देवी दशों दिशाओं में रक्षा करें। जया आगे से और विजया पीछे करे।

anker भगवती की आराधना करने से इन नौ दिवस में सप्तसती का पाठ करने से अपमृत्यु (अकालमृत्यु अर्थात अग्नि, जल-बिजली एवं सर्प आदि से होने वाली मृत्यु) नहीं होती, (अर्थात अकाल मृत्यु नहीं मरता) एवं पूर्ण दीर्घायु को प्राप्त हो वर्षों जीवित रहता है।

चतुर्भुजे चतुर्वक्त्रसंस्तुते परमेश्वरि।रूपं देहि जयं देह‍ि यशो देहि द्धिषो जह‍ि।।

कृष्णेन संस्तुते देवि शश्रद्धक्त्या सदाम्बिके।रूपं देह‍ि जयं देहि यशोदेहि द्धिषो जहि।।

ainkerभगवती को नमस्कार कर माँगों आपको क्या नहीं दें। हे चतुर्मुख ब्रह्माजी द्वारा प्रशंसित चारभुजा धारिणी परमे‍श्वरि! तुम रूप दो, जय दो, यश दो और काम-क्रोध आदि शत्रुओं का नाश करो। देवी अम्बिके! भगवान विष्णु नित्य निरंतर भक्तिपूर्वक तुम्हारी स्तुति करते रहते हैं। तुम रूप दो, जय दो और काम-क्रोध आदि शत्रुओं का नाश करो।इस प्रकार आरधना स्वयं कृष्ण निरंतर करते हैं, ऐसी मोक्षदायिनी भगवती की आराधना किसी भी रूप में करने से किसी के भी द्वारा की जाए, वह कल्याण का भागी होता है।

ainker: नौ रात्रि में मनुष्य यदि ब्रह्म मुहूर्त में राम रक्षा स्तोत्र का पाठ सात, ग्यारह या इक्कीस बार करे तो अनन्य सुख-संपत्ति एवं मोक्ष को प्राप्त करेगा।

नवरात्र के अवसर पर ब्रत के पकवान
एंकर:त्यौहारों का मौसम और पर्वों का मेला ...देश के तमाम अंचलों में यों तो साल भर कोई न कोई पर्व या ब्रत हर माह आता है और पकवानों की बहार आती है । तरह-तरह के पकवान बनते हैं ...कुछ पकवान अपने ख़ास अंचल और ख़ास पर्व की वजह से ख़ास होते हैं पर ब्रत के लिए आमतौर पर सीधे साधे तरीके से कुछ व्यंजन बन जाता है...जो लोग ब्रत रखते हैं वे उसी से अपना ब्रत पूरा कर लेते हैं । ब्रत और सादगी का कहीं - कहीं बड़ा आग्रह होता है पर ब्रत,पर्व और उत्सव का उल्लास जब हिलोंरें मारता है तब पकवान और ब्रत के पकवान भी कहाँ पीछे रहने वाले । अब ब्रत के पकवानों में भी खासी विविधता और स्वाद में काफी निखार आता जा रहा है ...अब आप वे सारे व्यंजन और पकवान ब्रत के समय आजमा सकते हैं जो त्यौहार या पर्व के दिन ब्रत न करने वाले मजे से खा रहे हों । आइये जानते हैं कि इन्हें किस खूबी और सादगी से बनाया जाता है __

सिंघाड़े के गुलाब जामुनतैयारी का समय : २० मिनटपकाने का समय : ३० मिनटसामग्री : ५०० ग्राम खोया१०० ग्राम सिंघाड़े का आटा५०० ग्राम घी१/२ कप दूध१/२ चम्मच पिसी इलायची५० ग्राम किसमिस१ किलो चीनीविधि:_सब से पहले भगौने में एक लीटर पानी लें उसमे चीनी डाल कर आंच में रख १० मिनट उबालें । इस तरह चासनी तैयार हो जायेगी । चासनी पर इलायची का पाउडर बुरक दें ।_अब गुलाब जामुन की के लिए तैयार सामग्री __खोया और सिंघाडे के आटे को एक साथ मिला कर दूध से गूंथें और लायची मिलकर गोल लड्डू बना लें । लड्डू बनाते समय बीच में किसमिस रख दें। लड्डू बढिया और गोल बनें इसके लिए हथेलियों पर घी लगा लें। _अब कडाही में घी डाल कर लड्डुओं को घीमी आंच पर सेकें ...लड्डू धीरे - धीरे गुलाबी होने लगेंगे ...अब हलके ब्राउन हो जाएँ तो घी से निकाल कर उन्हें चासनी मे डालें ...इस तरह आपके ब्रत वाले गुलाब जामुन तैयार !kuttoo kee namakeen poodiyaan : तैयारी का समय : १५ से २० मिनटपकाने का समय: २० मिनटसामग्री : २५० ग्राम कुटू का आटा२०० ग्राम लौकी २५० ग्राम घी - नमक स्वाद के अनुसार विधि:_लौकी को कद्दूकस करके ...कुटू के आटे के साथ नमक मिलाकर गूँथ लें ।_अब गुथें हुए आटे के छोटे -छोटे पेडे बना कर पूडी साइज में बेल लें ।_कडाही में घी गरम करें ...और पूडियां तलें ।-पूरियों को दही के साथ परोसें ...डायबिटीज से प्रभावित लोग दही में सुगर - फ्री गोलियाँ डाल सकतें हैं ।साबूदाने की नमकीन टिक्की तैयारी का समय : २० से २५ मिनटपकाने का समय : ३० मिनटसामग्री :एक कप साबूदाने२०० ग्राम आलू१/२ चम्मच पिसी काली मिर्च२ हरी मिर्चनमक स्वाद के अनुसारविधि :_१२ घंटे पहले पानी में साबूदाने भिगो दें ।_आलू उबाल कर छिलके निकालें फ़िर आलू और साबूदानें दोनों को बराबर मिला कर नमक -मिर्च डाल कर बड़े पेडे के आकार की टिक्की बना लें । _अब घी कडाही में डालकर धीमी आंच में टिक्कियाँ सकें ।_स्वादिष्ट टिक्कियाँ तैयार ...अब दही का साथ परोसें । नवरात्र के लिए विशेष ' पंचामृत 'तैयारी का समय : १० से २० मिनटसामग्री : १/२ लीटर दूध १०० ग्राम दही १०० ग्राम चीनी १ चम्मच शहद १० ग्राम चिरौंजी १० ग्राम मखाने २० ग्राम किसमिस १० ग्राम सूखा किसा हुआ नारियल २० छुहारे कटे हुए छोटे टुकडों में __एक चम्मच गंगाजल । __५ तुलसी की पत्ती विधि : दूध में दही को बराबर मिला लें ...चीनी डालें ...कटे हुए छुहारे , मखाने ,नारियल और साबुत चिरौंजी , किसमिस मिला दें । __इसके बाद शहद मिलाएँ । इसमें तुलसी की पाँच पत्तियाँ और गंगाजल अवश्य डालें ...तभी 'पंचामृत' सात्विक और पवित्र बनेगा

शहर के मन्दिर .......!!!

यह प्रस्तावित रूपरेखा है __क्या बनाना है , कैसे बनाना है , कब बनाना है ....उसी हिसाब से हर दिन की कार्य - योजना बनेगी ! बन कर क्या दिखेगा यह कागज़ पर नहीं दरसाया जा सकता ! __वैसे देवी-देवताओं के कार्यक्रम के सन्दर्भ में ...मैं अनुष्ठानिक भाव ग्रहण करता हूँ ...और संकल्पबद्ध होता हूँ ...ऐसे विषयों पर यूँ ही छेड़खानी शास्त्र - सम्मत नहीं है !












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शनिवार, 7 फ़रवरी 2009

नवरात्र के अवसर पर ब्रत के पकवान

त्यौहारों का मौसम और पर्वों का मेला ...देश के तमाम अंचलों में यों तो साल भर कोई न कोई पर्व या ब्रत हर माह आता है और पकवानों की बहार आती है । तरह-तरह के पकवान बनते हैं ...कुछ पकवान अपने ख़ास अंचल और ख़ास पर्व की वजह से ख़ास होते हैं पर ब्रत के लिए आमतौर पर सीधे साधे तरीके से कुछ व्यंजन बन जाता है...जो लोग ब्रत रखते हैं वे उसी से अपना ब्रत पूरा कर लेते हैं । ब्रत और सादगी का कहीं - कहीं बड़ा आग्रह होता है पर ब्रत,पर्व और उत्सव का उल्लास जब हिलोंरें मारता है तब पकवान और ब्रत के पकवान भी कहाँ पीछे रहने वाले । अब ब्रत के पकवानों में भी खासी विविधता और स्वाद में काफी निखार आता जा रहा है ...अब आप वे सारे व्यंजन और पकवान ब्रत के समय आजमा सकते हैं जो त्यौहार या पर्व के दिन ब्रत न करने वाले मजे से खा रहे हों । आइये जानते हैं कि इन्हें किस खूबी और सादगी से बनाया जाता है __

सिंघाड़े के गुलाब जामुन
तैयारी का समय : २० मिनट
पकाने का समय : ३० मिनट
सामग्री : ५०० ग्राम खोया
१०० ग्राम सिंघाड़े का आटा
५०० ग्राम घी
१/२ कप दूध
१/२ चम्मच पिसी इलायची
५० ग्राम किसमिस
१ किलो चीनी

विधि:
_सब से पहले भगौने में एक लीटर पानी लें उसमे चीनी डाल कर आंच में रख १० मिनट उबालें । इस तरह चासनी तैयार हो जायेगी । चासनी पर इलायची का पाउडर बुरक दें ।
_अब गुलाब जामुन की के लिए तैयार सामग्री __खोया और सिंघाडे के आटे को एक साथ मिला कर दूध से गूंथें और लायची मिलकर गोल लड्डू बना लें । लड्डू बनाते समय बीच में किसमिस रख दें। लड्डू बढिया और गोल बनें इसके लिए हथेलियों पर घी लगा लें।
_अब कडाही में घी डाल कर लड्डुओं को घीमी आंच पर सेकें ...लड्डू धीरे - धीरे गुलाबी होने लगेंगे ...अब हलके ब्राउन हो जाएँ तो घी से निकाल कर उन्हें चासनी मे डालें ...इस तरह आपके ब्रत वाले गुलाब जामुन तैयार !
kuttoo kee namakeen poodiyaan :
तैयारी का समय : १५ से २० मिनट
पकाने का समय: २० मिनट
सामग्री :
२५० ग्राम कुटू का आटा
२०० ग्राम लौकी
२५० ग्राम घी
- नमक स्वाद के अनुसार

विधि:
_लौकी को कद्दूकस करके ...कुटू के आटे के साथ नमक मिलाकर गूँथ लें ।
_अब गुथें हुए आटे के छोटे -छोटे पेडे बना कर पूडी साइज में बेल लें ।
_कडाही में घी गरम करें ...और पूडियां तलें ।
-पूरियों को दही के साथ परोसें ...डायबिटीज से प्रभावित लोग दही में सुगर - फ्री गोलियाँ डाल सकतें हैं ।

साबूदाने की नमकीन टिक्की
तैयारी का समय : २० से २५ मिनट
पकाने का समय : ३० मिनट
सामग्री :
एक कप साबूदाने
२०० ग्राम आलू
१/२ चम्मच पिसी काली मिर्च
२ हरी मिर्च
नमक स्वाद के अनुसार

विधि :
_१२ घंटे पहले पानी में साबूदाने भिगो दें ।
_आलू उबाल कर छिलके निकालें फ़िर आलू और साबूदानें दोनों को बराबर मिला कर नमक -मिर्च डाल कर बड़े पेडे के आकार की टिक्की बना लें ।
_अब घी कडाही में डालकर धीमी आंच में टिक्कियाँ सकें ।
_स्वादिष्ट टिक्कियाँ तैयार ...अब दही का साथ परोसें ।

नवरात्र के लिए विशेष ' पंचामृत '
तैयारी का समय : १० से २० मिनट
सामग्री :
१/२ लीटर दूध
१०० ग्राम दही
१०० ग्राम चीनी
१ चम्मच शहद
१० ग्राम चिरौंजी
१० ग्राम मखाने
२० ग्राम किसमिस
१० ग्राम सूखा किसा हुआ नारियल
२० छुहारे कटे हुए छोटे टुकडों में
__एक चम्मच गंगाजल ।
__५ तुलसी की पत्ती

विधि :

दूध में दही को बराबर मिला लें ...चीनी डालें ...कटे हुए छुहारे , मखाने ,नारियल और साबुत चिरौंजी , किसमिस मिला दें । __इसके बाद शहद मिलाएँ । इसमें तुलसी की पाँच पत्तियाँ और गंगाजल अवश्य डालें ...तभी 'पंचामृत' सात्विक और पवित्र बनेगा .


_पुष्पा रिछारिया
आम्रपाली ग्रीन - बी-१२०२ ए , १३ वीं मंजिल
१/३ वैभव खंड , इंदिरापुरम
गाजियाबाद - उत्तर प्रदेश

फ़ोन: ०१२० ४१३ ४६ ७१









गुरुवार, 22 जनवरी 2009

आजकल

आजकल सब टीक है