सम्पादकीय कोआर्डिनेटर : ३ - २० से २५ हजार = ७५,000 हजार प्रति माह
सम्पादकीय सहयोगी : ८ - १० से १२ हजार = ९६,000 हजार
लेखक , रिपोर्टर , फोटो ग्राफर ( फ्रीलांस ) = १,००,००० लाख
यात्रा भत्ता और टेलीफोन = ५०,००० हजार कुल मासिक = ३,२१,००० प्रति माह
प्रति सप्ताह = ८०,२५० रु ।
कम्प्युटर और ग्राफिक्स : टीम लीडर =१५,०००
सहयोगी ४ ( ८-१०-१२ हजार ) = ४८,०००
विज्ञापन : लीडर =२०,०००
सहयोगी - २ ( १२ से १५ हजार ) =३०,०००
प्रसार :लीडर =१५,०००
सहयोगी २ (८ से १० हजार ) = २०,००० कुल मासिक =१,४८,०००
प्रति सप्ताह = ३७,०००
सोमवार, 20 अप्रैल 2009
...समाचार - विचार साप्ताहिक
प्रति रविवार प्रकाशित होने वाले __सम्पूर्ण समाचार-विचार साप्ताहिक के प्रकाशन की प्रस्तावित रूपरेखा __
पेज : १६ + ८ = २४
पेज : मैगजीन ३६ ....कुल पेज : ६०
प्रकाशन : प्रति रविवार मूल्य : १० रु । * किसी भी तरह का आई कार्ड दर्ज कराने पर सिर्फ़ _७रु ।
प्रथम - खंड
१-फ्रंट पेज _ ५ से ७ विश्लेषात्मक समाचार + एंकर + एक इंटरव्यू
२-इस सप्ताह / अगले सप्ताह + राशिफल + प्रतिक्रया + कार्टून +.....+.....
३ - ४ -नेशनल न्यूज ट्रेक
५ - ६ -रीजनल न्यूज ट्रेक
द्वितीय खंड : ७ - ८ - ९ - १० विशेष : मंथन _ पेज -७ _ सम्पादकीय
_ अग्रलेख
_ उपलेख
_ टिप्पणी २
_ विशेष टिप्पणी १
_ कार्टून
पेज -८ - ९ :एक ही मुद्दे पर क्रेंदित दो पेज
पेज - १० : छोटे - बड़े तीन इन्टरव्यू + २ - ३ समीक्षा
११ -१२ :कौर्पोरेट + बाजार + टेक्नोलोजी
१३ -१४ : खेल
१५ -सिनेमा - मनोरंजन
१६- इन्द्रधनुष : देश - विदेश की विविध रोचक खबरें + फोटो + ग्राफिक्स
तृतीय खंड : मेट्रो प्लस __दिल्ली व एनसीआर
विकास, स्थानीय राजनीत, शिक्षा , चिकित्सा , रियल स्टेट , सिनेमा रिलीज ,प्रमोशन ,टीवी ,संगीत ,नृत्य ,कला,सभा -सेमीनार ,धार्मिक आयोजन,खेल गतिविधि,बाजार ..., ....,
१- दिल्ली व एनसीआर की खबरें
२-३ :सिनेमा,टीवी , स्थानीय गतिविधियाँ, सितारों के कार्यक्रम ,फ़िल्म प्रोमोशन ,रैली ,ट्रेडफेयर,जंतर-मंतर
४-नोयडा, ग्रेटर नोयडा ,गाजियाबाद ,बसुन्धरा वैशाली
५- गुडगाँव ,फरीदाबाद
६-७ : रीयल स्टेट , शिक्षण संस्थान , मेडीकल, शापिंग माल ,बाजार
८- ग्लैमरस फोटो व खबरें
चतुर्थ खंड : वाह जिंदगी ! ३६ पेज की रंगीन पत्रिका __यह अखबार निकालने के तीन माह बाद यानी __जनवरी २०१० में प्रकाशित होगी ! इसका विवरण और योजना बाद में __यह पत्रिका महिलाओं और युवा वर्ग को ध्यान में रख कर बनेगी !!!
पेज : १६ + ८ = २४
पेज : मैगजीन ३६ ....कुल पेज : ६०
प्रकाशन : प्रति रविवार मूल्य : १० रु । * किसी भी तरह का आई कार्ड दर्ज कराने पर सिर्फ़ _७रु ।
प्रथम - खंड
१-फ्रंट पेज _ ५ से ७ विश्लेषात्मक समाचार + एंकर + एक इंटरव्यू
२-इस सप्ताह / अगले सप्ताह + राशिफल + प्रतिक्रया + कार्टून +.....+.....
३ - ४ -नेशनल न्यूज ट्रेक
५ - ६ -रीजनल न्यूज ट्रेक
द्वितीय खंड : ७ - ८ - ९ - १० विशेष : मंथन _ पेज -७ _ सम्पादकीय
_ अग्रलेख
_ उपलेख
_ टिप्पणी २
_ विशेष टिप्पणी १
_ कार्टून
पेज -८ - ९ :एक ही मुद्दे पर क्रेंदित दो पेज
पेज - १० : छोटे - बड़े तीन इन्टरव्यू + २ - ३ समीक्षा
११ -१२ :कौर्पोरेट + बाजार + टेक्नोलोजी
१३ -१४ : खेल
१५ -सिनेमा - मनोरंजन
१६- इन्द्रधनुष : देश - विदेश की विविध रोचक खबरें + फोटो + ग्राफिक्स
तृतीय खंड : मेट्रो प्लस __दिल्ली व एनसीआर
विकास, स्थानीय राजनीत, शिक्षा , चिकित्सा , रियल स्टेट , सिनेमा रिलीज ,प्रमोशन ,टीवी ,संगीत ,नृत्य ,कला,सभा -सेमीनार ,धार्मिक आयोजन,खेल गतिविधि,बाजार ..., ....,
१- दिल्ली व एनसीआर की खबरें
२-३ :सिनेमा,टीवी , स्थानीय गतिविधियाँ, सितारों के कार्यक्रम ,फ़िल्म प्रोमोशन ,रैली ,ट्रेडफेयर,जंतर-मंतर
४-नोयडा, ग्रेटर नोयडा ,गाजियाबाद ,बसुन्धरा वैशाली
५- गुडगाँव ,फरीदाबाद
६-७ : रीयल स्टेट , शिक्षण संस्थान , मेडीकल, शापिंग माल ,बाजार
८- ग्लैमरस फोटो व खबरें
चतुर्थ खंड : वाह जिंदगी ! ३६ पेज की रंगीन पत्रिका __यह अखबार निकालने के तीन माह बाद यानी __जनवरी २०१० में प्रकाशित होगी ! इसका विवरण और योजना बाद में __यह पत्रिका महिलाओं और युवा वर्ग को ध्यान में रख कर बनेगी !!!
शनिवार, 11 अप्रैल 2009
बुनियादी तौर पर मैं !
बुनियादी तौर पर मैं __रस , रंग , कविता और अभिनय के फोर्स व फ्लेवर से संचालित रहा हूँ । मेरी किसी भी किसिम की रचनात्मकता में __समय , समाज और सभ्यता का स्पष्ट वेग रहा है । __अपने पहले कृतित्व __स्व संपादित ' इन्द्रधनुष ' ( सन १९७५ में संपादित-प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ) और बाद में मुम्बई के दौर में __हिन्दी एक्सप्रेस, श्री वर्षा, करंट और धर्मयुग के सम्पादकीय-कर्म में ये गुण-तत्व बराबर निखार पाते रहे । चक्रम और मेट्रो टाइम (ये दोनों अखबार क्रमश जून १९८७ , इलाहबाद और मई १९९१, दिल्ली ) के दौरान ये और निखार पर आए ।
लेखन-सम्पादन से ज्यादा मेरी रुचि __कांसेप्ट, प्लानिंग, लेआउट और प्रेजेंटेशन में रही __जिसका भरपूर प्रवाह राष्ट्रीय सहारा के ' उमंग ' और ' खुला पन्ना ' में १९९१ से १९९५ तक प्रर्दशित है ।
भाषा की रवानी , कथ्य की कहानी , आकषर्क फोटो और ग्राफिक्स से सजे ...धर्मयुग , करंट , राष्ट्रीय सहारा के उमंग और खुला पन्ना के वे पन्ने हालाँकि इतिहास के झरोखे से उन लोगों के जेहन में अभी भी झांकते हैं जो उस दौर के हिन्दी-प्रवाह के साथ आँख खोल कर चले और आज भी अतीत की उस श्रेष्ठता को सराहने में झेंपते नहीं ।...और मैं ...मैं तो बेचैन हूँ ...नए कैनवास की तलाश में ...जहाँ फ़िर पत्रकारिता का नया बसंत रचा जा सके ।
कागज़ हो , कैनवास हो , पिक्चर ट्यूब हो या वेब जनित नया मोर्चा __प्रक्षेपण का आगाज हो तो __नए और समयाकूल तीर अभी भी तैयार हैं __नई इबारत लिखने के लिए !
डॉ . धर्मवीर भारती , डॉ महावीर अधिकारी , शरद जोशी का सानिध्य और रचना-संजाल अभी भी जीवंत है !...धारदार है ! !
...अपनी सोच , समझ और अभिव्यकि्त की क्षमता __रस, रंग, कविता और अभिनय के फोर्स और फ्लेवर से अभी भी लबरेज और तरोताजा है ।
लेखन-सम्पादन से ज्यादा मेरी रुचि __कांसेप्ट, प्लानिंग, लेआउट और प्रेजेंटेशन में रही __जिसका भरपूर प्रवाह राष्ट्रीय सहारा के ' उमंग ' और ' खुला पन्ना ' में १९९१ से १९९५ तक प्रर्दशित है ।
भाषा की रवानी , कथ्य की कहानी , आकषर्क फोटो और ग्राफिक्स से सजे ...धर्मयुग , करंट , राष्ट्रीय सहारा के उमंग और खुला पन्ना के वे पन्ने हालाँकि इतिहास के झरोखे से उन लोगों के जेहन में अभी भी झांकते हैं जो उस दौर के हिन्दी-प्रवाह के साथ आँख खोल कर चले और आज भी अतीत की उस श्रेष्ठता को सराहने में झेंपते नहीं ।...और मैं ...मैं तो बेचैन हूँ ...नए कैनवास की तलाश में ...जहाँ फ़िर पत्रकारिता का नया बसंत रचा जा सके ।
कागज़ हो , कैनवास हो , पिक्चर ट्यूब हो या वेब जनित नया मोर्चा __प्रक्षेपण का आगाज हो तो __नए और समयाकूल तीर अभी भी तैयार हैं __नई इबारत लिखने के लिए !
डॉ . धर्मवीर भारती , डॉ महावीर अधिकारी , शरद जोशी का सानिध्य और रचना-संजाल अभी भी जीवंत है !...धारदार है ! !
...अपनी सोच , समझ और अभिव्यकि्त की क्षमता __रस, रंग, कविता और अभिनय के फोर्स और फ्लेवर से अभी भी लबरेज और तरोताजा है ।
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